समुद्र संरक्षण के प्रति एनआईटी राउरकेला का जागरूकता कार्यक्रम
सतीश शर्मा (उप संपादक)
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला के पृथ्वी एवं वायुमंडलीय विज्ञान विभाग की ओर से बुधवार (16 सितंबर) को केंद्रीय विद्यालय, एनआईटी राउरकेला में समुद्र संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम एवं पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर 5.0 के तहत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार के डीप ओशन मिशन के अंतर्गत आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वच्छ महासागरों, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र तथा समुद्री पर्यावरण के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों के प्रति जागरूक करना था। पोस्टर प्रतियोगिता में केंद्रीय विद्यालय के करीब 150 विद्यार्थियों ने भाग लिया और समुद्र संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का नेतृत्व एनआईटी राउरकेला के पृथ्वी एवं वायुमंडलीय विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रो. नरेश कृष्ण विस्सा ने विभाग के अन्य शिक्षकों के सहयोग से किया। विद्यार्थियों को समुद्रों एवं समुद्री जीव-जंतुओं पर प्रदूषण के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए स्वच्छ एवं सुरक्षित समुद्री पर्यावरण के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनआईटी राउरकेला के डीन (एसआरआईसीसीई) प्रो. सौरव चटर्जी ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया तथा संरक्षण की शपथ में भाग लिया। उन्होंने कहा कि समुद्री वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं का संरक्षण तथा महासागरों में प्रदूषण को न्यूनतम करना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से भविष्य के लिए महासागरों को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
पृथ्वी एवं वायुमंडलीय विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रो. नरेश कृष्ण विस्सा ने युवा पीढ़ी से तटीय क्षरण, समुद्री कचरे और प्रदूषण से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने तथा टिकाऊ भविष्य के लिए समुद्री संसाधनों के संरक्षण को आवश्यक बताया।
केंद्रीय विद्यालय, एनआईटी राउरकेला की प्राचार्या श्रीमती पी. नीरजा ने विद्यार्थियों को स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर 5.0 में सक्रिय भागीदारी करने तथा समुद्र एवं समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने स्वच्छ और सुरक्षित महासागरों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए संरक्षण की शपथ ली। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को समुद्री पर्यावरण के महत्व को समझने, अपने विचारों को रचनात्मक ढंग से व्यक्त करने तथा टिकाऊ समुद्री भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका पहचानने का अवसर प्रदान किया।





